जालौन: बीहड़ के गांव में चाइल्ड लाइन ने कराई बच्चों की खुली सभा, सरकारी योजनाओं की पहुंच से दूर हैं ग्रामीण

बीहड़ के गांव में चाइल्ड लाइन ने कराई बच्चों की खुली सभा, सरकारी योजनाओं की पहुंच से दूर हैं ग्रामीण
उरई। दूरवर्ती बीहड़ के गांव आज भी अधिकारियों की आंख से ओझल हैं जिसके कारण यहां जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है। माधौगढ़ ब्लाक के गांव सूपा में चाइल्ड लाइन 1098 द्वारा आयोजित की गई खुली बैठक में यह बात निकलकर सामने आयी।
सूपा में बालिका शिक्षा की दुर्दशा हो रही है। जिससे बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओं का नारा बेमकसद होकर रह गया है। साधना, संध्या, वंदना, रूचि व नीलम आदि बालिकाओं ने बताया कि उनमें पढ़ने की ललक है लेकिन आठवी के बाद मजबूरी में उनकी शिक्षा में विराम लग जाता है। गांव में आसपास दूर तक हाईस्कूल और इंटर कालेज नहीं है अभिभावक बच्चियों के एडमीशन आगे की पढ़ाई के लिए कुठौंदा और रेढ़र में कराते हैं जो कि गांव से 25 किलो मीटर दूर हैं। बालिकाओं के पास अभिभावकों के साधनहीन होने से साईकिल भी नहीं है। इसके अलावा वहां तक जाने का रास्ता बीहड़ी होने के कारण असुरक्षित है जिससे माता पिता उन्हें स्कूल भेजने का जोखिम मोल नहीं लेना चाहते। एडमीशन के बावजूद वे घर में ही बनी रहती हैं जिससे पढ़ाई छोड़कर घरेलू कामकाज में ही उनको उलझा रहना पड़ता है।
गांव के प्राथमिक विद्यालय का भी पुरसाहाल नहीं है। कक्षा 5 की छात्रा तान्या ने बताया कि लाॅकडाउन के पहले जब स्कूल खुल रहा था मास्टर जी आने के तत्काल बाद कुर्सी पर बैठकर सो जाते थे। उन्हें कचोटकर जगाना पड़ता था लेकिन कुछ ही देर में उनको फिर से नींद आ जाती थी। आंगनबाड़ी के बारे में गांव की ही कल्पना ने बताया कि दो साल से आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं खोला गया। कार्यकत्री पूरा पुष्टाहार बाजार में बेच देती हैं अगर कभी वे केन्द्र में पहुंची और कोई बच्चा आ गया तो उसे दुत्कार देती हैं। कुछ बच्चों ने स्कूल की मिड-डे मील की सामग्री और कन्वर्जन कास्ट न मिलने की शिकायत की। कई बच्चों को सिर में फुंसियां हो गई हैं लेकिन अस्पताल दूर होने से उनका उपचार नहीं हो पा रहा है। अनुज नाम के कक्षा 6 के बच्चे ने बताया कि वह बंगरा के मां मंगला विद्यापीठ स्कूल में पढ़ता था जो अचानक बंद हो गया। अब टीसी न मिलने से किसी और स्कूल में उसका एडमीशन नहीं हो पा रहा और उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है।

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