जालौन: कोरोना योद्धाओं के सम्मान में दीवारों पर बनाई पेटिंग, गुरु के इटौरा निवासी पुष्पेंद्र पेटिंग के माध्यम से फैला रहे जागरुकता

कोरोना योद्धाओं के सम्मान में दीवारों पर बनाई पेटिंग
गुरु के इटौरा निवासी पुष्पेंद्र पेटिंग के माध्यम से फैला रहे जागरुकता

जालौन: लॉकडाउन के दौरान दिल्ली से घर आए युवा चित्रकार पुष्पेंद्र कुमार राज (25) ने कोरोना के खिलाफ जागरुकता अभियान चलाया। उन्होंने अपने गांव में गेरू कोयला चूना से मिलाकर कच्ची दीवारों पर वाल पेटिंग कर कोरोना योद्धाओं का सम्मान करने को प्रेरित किया।

जालौन: कोरोना योद्धाओं के सम्मान में दीवारों पर बनाई पेटिंग, गुरु के इटौरा निवासी पुष्पेंद्र पेटिंग के माध्यम से फैला रहे जागरुकता


जिले के कदौरा ब्लाक के ग्राम गुरु का इटौरा निवासी शिक्षक स्वामीदीन के चित्रकार पुत्र पुष्पेंद्र कुमार की शुरूआती पढ़ाई गांव में हुई। उन्हें शुरु से ही पेटिंग का शौक था। उसे पूरा करने के लिए 2012 में झांसी चले गए। जहां बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ललित कला से स्नातक और परास्नातक किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें पेटिंग का काम मिलना लगा। उनके हुनर को देखकर पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कई पुरस्कार जीते। उन्हें कुलपति के अलावा झांसी रेलवे स्टेशन पर पेटिंग करने के लिए डीआरएम ने भी सम्मानित किया। इसके बाद 2018 में दिल्ली में पेटिंग का काम करने लगे। इसी बीच कोरोना के कारण लॉकडाउन लग गया। जैसे ही लॉकडाउन के दौरान घर जाने की अनुमति मिली तो पुष्पेंद्र घर आ गए। कोरोना को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह की आशंकाएं थी। लोग कोरोना संक्रमित के अलावा कोरोना के काम में लगे स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मियों से भी डर रहे थे। लोगों के मन से डर निकालने और उन्हें कोरोना योद्धाओं के प्रति प्रेरित करने के लिए गांव की कच्ची दीवारों पर पेटिंग का काम शुरू किया।
पुष्पेंद्र ने बताया कि वह खाली थे। लिहाजा सबसे पहले उन्होंने अपने घर की कच्ची दीवार पर ही पेटिंग बनाना उचित समझा। दीवार पर डॉक्टर, नर्स, मीडिया कर्मी और सफाई कर्मी, डाककर्मी, पुलिस कर्मी जैसे कोरोना योद्धाओं के चित्र बनाए। साथ ही दो गज दूरी, मास्क है जरूरी का संबंधी चित्र भी चित्रित किया। उनकी पुराने घर की कच्ची दीवार चित्रों से सज गई। यह देखकर गांव के कुछ लोगों ने अपनी अपनी कच्ची दीवार पर भी चित्र बनाने का उनसे अनुरोध किया। इस पर उन्होंने गेरु, कोयला और चूना के माध्यम से आधा दर्जन दीवारों पर चित्र बनाए।
जागरुकता की पेटिंग बनाकर हो चुके हैं चर्चित
पुष्पेंद्र बताते है कि उन्होंने इसके अलावा कन्या भ्रूण हत्या पर जागरुकता के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, जिले की नवाचार योजना कौन बनेगा नन्हा कलाम, मिशन शक्ति से संबंधित चित्र, वूमेन पावर, रानी लक्ष्मीबाई, प्रथम महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले और संविधान निर्माता डॉ भीमराव आंबेडकर व डॉ अब्दुल कलाम के चित्र भी बनाए। जिससे उनके गांव की सुंदरता और निखर गई। खास बात यह हो गई है कि उनके बनाए गए चित्र अब गांव में सेल्फी प्वाइंट बन गए हैं। लोग गांव आकर इन चित्रों के सामने सेल्फी भी लेते है।
बालीवुड अभिनेता सोनू सूद ने की सराहना
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों मदद कर चर्चित हुए बालीवुड अभिनेता सोनू सूद की भी पुष्पेंद्र ने अपने गांव की दीवार पर रीयल हीरो बताकर पेटिंग बनाई और उन्होंने उसे अपने ट्वीटर एकाउंट से अभिनेता के पास भेजा। सोनू सूद को पुष्पेंद्र की कलाकार इतनी पसंद आई कि उन्होंने उनकी सराहना करते हुए यह भी रिट्वट किया कि वे जल्द उनसे मिलने उनके गांव आएंगे।
कई बार हो चुके हैं सम्मानित
भारतीय विश्वविद्यालय संघ की ओर से रांची में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव में पुष्पेंद्र को उनके चित्र के लिए दूसरा पुरस्कार मिला है। विश्वविद्यालय और राज्य स्तर पर भी उन्हें कई पुरस्कार मिले है। इसके अलावा कई अधिकारियों ने भी उन्हें सम्मानित किया है।
कुंभ मेले में भी की पेटिंग
प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले में भी पुष्पेंद्र ने पेटिंग बनाकर कुंभ मेले को सुसज्जित करने में योगदान दिया है। उन्होंने प्रयागराज के कैंट एरिया समेत कई जगह पेटिंग की है। कई रेलवे स्टेशनों पर भी उनकी पेटिंग है। दिल्ली मेट्रो स्टेशन व गाजियाबाद फ्लाईओवर, जबलपुर स्मार्ट सिटी और इंदौर स्मार्ट प्रोजेक्ट में भी वे पेटिंग बना चुके हैं।
ऐतहासिक मंदिर की तस्वीर बनाई
जिले के ऐतहासिक रोपण गुरु मंदिर की कोई तस्वीर नहीं थी। जिससे लोगों को सार्वजनिक दर्शन में परेशानी होती थी। पुष्पेंद्र ने गुरु रोपण की प्रतिमा को चित्र में बदलकर एक बड़ी पेटिंग बना दी। अब उनका चित्र सार्वजनिक रुप से मंदिर के बाहर लगा दिया गया है। जिससे लोग कभी भी दर्शन कर सकते हैं।
मदद का भी दिया भरोसा
पुष्पेंद्र के हुनर को देखकर आयुष्मान योजना के डीपीसी डॉ आशीष कुमार झा ने भी पुष्पेंद्र की मदद का भरोसा दिया है। उनका कहना है कि वे आयुष्मान योजना का चित्र का प्रचार प्रसार करें। इसके लिए वे उन्हें योजना से जोड़कर उनकी मदद भी करेंगे।

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