Categories: JALAUN

पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप (छात्रवृत्ति) बचाने के लिए चलाया जायेगा व्यापक अभियान : कुलदीप बौद्ध

छात्रों के लिए 76 वर्ष पुरानी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना बंद होने के कगार पर : भानु प्रिया


उरई/जालौन। छात्रवृत्ति के बजट में लगातार की जा रही कटौती के ख़िलाफ़ बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच व दलित आर्थिक अधिकार आन्दोलन- एनसीडीएचआर द्वारा गणेश धाम उरई में एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। जिसमे केंद्र सरकार द्वारा देश के छात्रों खासकर दलित व वंचित समुदाय के स्टूडेंट्स के स्कालरशिप के बजट की लगातार की जा कटौती के खिलाफ़ आवाज उठाई। प्रेस वार्ता में दलित आर्थिक अधिकार आन्दोलन दिल्ली से आई रिसर्चर भानु प्रिया एवं बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध एवं रिहाना मंसूरी एवं स्टूडेंट लीडरों ने संबोधन किया व सवाल उठए एवं मीडिया के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री को भेजे जाने वाले 7 सूत्रीय मांग पत्र को रखा एवं छात्रवृत्ति को लेकर सरकार के द्वारा किये जा रहे षड़यंत्र को उजागर किया।


इनकी मांगों में सर्व प्रथम केंद्र को तुरंत आवश्यक धनराशि आवंटित करने और 62 लाख एससी-एसटी छात्रों को तुरंत लाभान्वित करने के लिए पीएमएस योजना को जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा की जाए। दूसरा “प्रतिबद्ध दायित्व (कमिटिड लायबिलिटी)” प्रणाली को समाप्त किया जाए, और केंद्र और राज्य के बीच 60:40 की हिस्सेदारी को तत्काल प्रभाव से पी.एम.एस योजना के लिए लागू किया जाए। तीसरी माँग में 62 लाख अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों को उचित छात्रवृत्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी पात्र छात्रों की पी.एम.एस की मांग को पूरा करने के लिए प्रति वर्ष केंद्रीय आवंटन को बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपये किया जाए। चौथी माँग में कहा कि सभी पात्र छात्र हर शैक्षणिक वर्ष के अंत में अपनी उचित छात्रवृत्ति प्राप्त करें यह सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध शिकायत प्रणाली हो, जो कि अस्वीकार किए गए पी.एम.एस आवेदन और विलंभित प्रतिपूर्ति जैसी छात्रों की समस्याओं का हल निकाले। पाँचवी माँग की कि सभी SC / ST छात्रों के लिए वर्तमान 2.5 लाख की बजाय आय की पात्रता मानदंड को बढ़ाकर 8 लाख किया जाए। छठी माँग सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को सी.पी.आई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) और मौजूदा मुद्रास्फीति के आधार पर मासिक पीएमएस राशि की इकाई को बढ़ाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षा के खर्चों की उभरती जरूरत ठीक से पूरी हो। और सबसे आखरी यानि कि सातवीं एवं सबसे महत्वपूर्ण माँग सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MSJE) और MOTA (जनजातीय मामलों का मंत्रालय), भारत सरकार, एक बेहतर निगरानी प्रणाली स्थापित करें और यह सुनिश्चित करें कि राज्य सरकार की माँगों को समय पर सुना जाए और उनके खाते में धनराशि जारी की जाए। इस दौरान भानु प्रिया रिसर्चर, रिहाना मंसूरी, कुलदीप कुमार बौद्ध संयोजक बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच, स्टूडेंट लीडर –  नंद कुमार बौद्ध, सचिन चौधरी, अर्सना मंसूरी मणि प्रजापति, प्रीती बौद्ध, दीक्षा, कीर्ति, कंचन वर्मा, आशीष कुमार, रामसिंह, प्रदुम्म, सुरजीत, पंचम सिंह, ओमेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।

Journalist Anil Prabhakar

Recent Posts

जालौन: विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू, उरई में निकाली जागरूकता रैली

जालौन : उरई 01 मार्च 2021 : विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का सोमवार को… Read More

16 hours ago

मुख्यमंत्री योगी ने जनपद वाराणसी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चोलापुर में मुख्यमंत्री आरोग्य मेला का अवलोकन किया

01 मार्च से 31 मार्च तक चलने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ कियामुख्यमंत्री… Read More

2 days ago

जालौन: एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर के चतुर्थ दिन विभिन्न स्वच्छता संबंधी कार्यक्रम

आज दिनांक 27 फरवरी 2021 को दयानंद वैदिक कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना के सात… Read More

3 days ago

जालौन: घर-घर टीबी रोगियों की खोज को चलेगा दस्तक अभियान : जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुग्रीव बाबू

संचारी रोग नियंत्रण दस्तक अभियान का आयोजन पहली मार्च से होगा जालौन, 27 फरवरी 2021… Read More

3 days ago

मुख्यमंत्री योगी ने कोविड-19 की फोकस टेस्टिंग किये जाने पर बल दिया

कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने में टेस्टिंग कार्य की महत्वपूर्ण भूमिका, इसे ध्यान में… Read More

4 days ago