नीति आयोग ने नई दिल्ली में “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” का दूसरा संस्करण जारी किया
वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही के लिए “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” का नवीनतम संस्करण भारत की व्यापार स्थिति का समग्र परिदृश्य प्रदान करता है, जो वैश्विक मांग-आपूर्ति परिप्रेक्ष्य, क्षेत्रीय प्रदर्शन और उभरते व्यापार अवसरों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराता है: डॉ. अरविंद विरमानी, माननीय सदस्य, नीति आयोग
नीति आयोग के माननीय सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने 28 मार्च, 2025 को नई दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही (जुलाई से सितंबर) के लिए “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” प्रकाशन के दूसरे संस्करण का विमोचन किया।
इस तिमाही के लिए भारत की व्यापार स्थिति का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करने के अलावा, इस संस्करण में वस्त्र क्षेत्र की भी जांच की गई है, जो निर्यात संवर्धन, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और भारत की समृद्ध विरासत तथा संस्कृति के प्रतिनिधित्व के माध्यम से आर्थिक विकास में प्रमुख योगदानकर्ता है।
वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही के दौरान, भारत का व्यापार प्रदर्शन निरंतर बना हुआ है। अप्रैल-सितंबर 2024 में कुल व्यापार 2023 की इसी अवधि की तुलना में 5.67% की दर से लगातार बढ़ रहा है। आयात के मामले में, तांबा शीर्ष दस क्षेत्रों में शामिल हो गया है, जो बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग के कारण आयात में साल-दर-साल 28% की मजबूत वृद्धि से प्रेरित है। पिछली तिमाही की तुलना में निर्यात की संरचना काफी हद तक स्थिर रही है, जिसमें विद्युत मशीनरी और परमाणु रिएक्टरों के निर्यात में साल-दर-साल वृद्धि हुई है, जबकि खनिज ईंधन और लोहा और इस्पात में वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में साल-दर-साल गिरावट देखी गई। क्षेत्रीय रूप से, उत्तरी अमरीका और यूरोपीय संघ भारत के निर्यात पर हावी हैं, जो कुल निर्यात में लगभग 40% योगदान देते हैं, जबकि पूर्वोत्तर एशिया और पश्चिम एशिया प्रमुख आयात स्रोत बने हुए हैं।
ट्रेड वॉच क्वार्टरली के इस संस्करण में भारत के कपड़ा क्षेत्र का भी आकलन किया गया है। यह ऐसा क्षेत्र है जो औद्योगिक उत्पादन, रोजगार और निर्यात आय में महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारत दुनिया के शीर्ष 10 निर्यातकों में से एक है और मामूली रूप से भारत वैश्विक व्यापार में 4% हिस्सेदारी रखता है।
भारत प्राकृतिक फाइबर-आधारित वस्त्रों, विशेष रूप से कपास और कालीनों में प्रतिस्पर्धी बना हुआ है, जो इसके वस्त्र निर्यात का लगभग 70% हिस्सा है। देश ने ऐतिहासिक रूप से प्राकृतिक फाइबर-आधारित वस्त्रों में उत्कृष्टता हासिल की है, वैश्विक बाजार मानव निर्मित और तकनीकी वस्त्रों की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव भारत के लिए अपने निर्यात में विविधता लाने, मूल्य संवर्धन बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को मजबूत करने का अवसर प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर डॉ. विरमानी ने व्यापक व्यापार प्रकाशन के लिए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भविष्य उन अर्थव्यवस्थाओं का है जो अनुकूलन करती हैं, और भारत का व्यापार परिदृश्य साहसिक कदमों के साथ बदल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रमुख क्षेत्रों में, वस्त्र औद्योगिक विकास और वैश्विक व्यापार के स्तंभ के रूप में स्थान रखता है।
डॉ. विरमानी ने तकनीकी वस्त्रों और परिधान निर्यात की बढ़ती वैश्विक मांग पूरी करने के महत्व पर भी बल दिया, जहां मांग का बड़ा हिस्सा केंद्रित है। उन्होंने उभरते भौगोलिक-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच वैश्विक व्यापार की बारीकी से निगरानी करने के महत्व पर भी बल दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि इस प्रकाशन के निष्कर्ष नीति निर्माताओं, उद्योग जगत और शिक्षाविदों के लिए मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं, जो भारत की व्यापार रणनीतियों को बढ़ाने के लिए मजबूत आधार के रूप में कार्य करते हैं।